• रवि जगमगाएगा फिर से

    रवि जगमगाएगा फिर से

    क्यों बने संकल्प पथ परवह चरण जो धूल परजल रहे होंगे सितारेउस सिंधु के कूल परप्रश्नचिह्न उनके चरणों परजिनको खुद चलना होगादिनकर तुम रहना सजगआख़िर तुम्हें ही जलना होगा। भरी रात्रि के अँधियारे मेंअश्रु बहकर खुले नयन सेलुढ़क-लुढ़क कर इस तरह वहतुमको ही बतलाएगा।विस्तृत नभ के आँगन मेंनित्य दिवस की परछाई परराग खेलते शलभों परमंच…

  • गीत: हर बेटी का सपना है

    गीत: हर बेटी का सपना है

    धरा गगन का कोना कोना,हर बेटी का अपना है। हरी – भरी धरती सा होना,हर बेटी का सपना है। हृदय तप्त है आज धरा का,आतप अत्याचारों से। तपकर तृप्त हृदय होगा कल,शीतल नवल फुहारों से। अन्तर्मन की तपोभूमि में,हर बेटी को तपना है। हरी भरी धरती सा होना,हर बेटी का सपना है। आर्तनाद को आकुल…

  • बेटी दिवस

    बेटी दिवस

    मोक्ष हो तुम जीवनीहर्ष की पर्याय हो,गर्व की अनुभूति होदान में अन्याय हो। तोड़ पिंजर नभ उड़ोवर्जनाएँ छोड़ दो,तथ्य से जो दूर होपृष्ठ सारे मोड़ दो। स्वप्न हो मेरे लिएमर्म हो शुभ न्याय हो! धूप हो तुम शीत कीग्रीष्म की तुम छाँव हो,हो तलैया की लहर तुमख़ुशनुमा सी गाँव हो। नेह की उपमान होगेह की…

  • खामोशी

    खामोशी

    एक खामोशी ! बहुत कुछ समेटती है, बहुत कुछ दफन करती है, लम्बी खामोशी! एक क़ैद, या मजबूरी जहन में एक साथ उमड़ते  सैकड़ों सवालों की! जज्बातों के उमड़ते सैलाब को रोकता हुआ बांध! खुद ही खुद से रूबरू कराने की नाकाम जद्दोजहद! बर्फ से रिश्तों को पिघलने से  रोकने की जिद! भावनाओं का रद्दी…

  • आओ शिक्षक दिवस मनाएं!

    आओ शिक्षक दिवस मनाएं!

    बड़े सुनहरे थे पल बीतेसभी पुरानी थीं जो रीतेंतब शिष्य सब कहाँ चतुर थेगुरु शिष्य संबंध मधुर थे! आरुणि की हम कथा सुनाएंआओ शिक्षक दिवस मनाएं! परंपरा गुरु रहे निभातेअर्जुन को बस लक्ष्य दिखातेअश्वत्थामा रहे भुलातेआरोपों से बच न पाते! एकलव्य हमें तो ग्रसता जाएआओ शिक्षक दिवस मनाएं अब शिक्षा भी रूप बदलकरकूद रही है…

  • ठुमक के आ गई होली रे

    ठुमक के आ गई होली रे

    फागुन में दिल हुआ रंगीलामन में टेसू फूलेरंग- बिरंगे रंगों के संगगुझिया मिठाई भटूरे देख के टोली हुरियारो कीदिल की धड़कन बोलीरंग- बिरंगे रंगों के संगठुमक के आ गयी होली नीला पीला हरा गुलाबीकेसरिया लाल गुलालभर भर के सब थाल सजे हैतन- मन रंग लो आज भूल जाओ सब झगड़े – झंझटभर पिचकारी लाओराग- द्वेष…

  • होरी राम सिया की

    होरी राम सिया की

    १. सरयू तट सुंदर ‌खेल रहे मनमोहक हैं सखि राम लला। पट पीत सजे प्रभु देह लली मुख कांति लगे जनु कोटि कला। सुध खोकर ताक रहा रवि भी कब साँझ भई दिन डूब चला। ढलते रवि ने कुछ सोच तभी निज रंग सखी प्रभु गाल मला।। २. निकसी गृह से सुकुमार सिया, उनके सँग…

  • रंगों की होली

    रंगों की होली

    रंग डारो ना कान्हा मोहे आजदूंगी भर भर गारी रे काहे मारी भर पिचकारीभीग गई मोरी अंगिया सारीमोरा भीग गया सब श्रंगारज़ालिम वनवारी रेमैं तो रंग गई सारी रे कैसी रार तूने ठानी रेकन्हैयालूंगी ना अब मैं तोहरीबलैया..तेरी बातों में ना आएगी येनार…काहे करे जोरा-जोरी रे कल तो फोरी मटकी हमारीनिरख रहे ब्रज के नर-नारीआज…

  • स्त्रियाँ

    स्त्रियाँ

    १.वे मीलों सफ़रतय कर आती हैंमौसमों के सभी रंगचुनरी में भर लाती हैं वे अपने हिस्से कीजमीन पररख देती हैंएक-एक टुकड़ाआसमान काऔर चुनकर रंगबिखेर देती हैंउन टुकड़ों पर । वे निराकार देहके रिश्तेबखूबी गढ़ती हैंऔर शरारती चिकुटी संगसौंप देती है उन्हेंएक-दूजे को । तब बिखर जाती है लाजदहके अनारों की मानिंदउन सभी के गालों परऔरखिलखिलाहट…

  • गीत: विष्णुपद छन्द

    गीत: विष्णुपद छन्द

    मन की तुलसी झुलस रही है,तन की ज्वाला में!हुलस रहा है मन विनिमज्जित,यौवन हाला में!! वायु प्रदूषण का हल तुलसी,तुलसी है पावन!प्राणवायु तन मन अनुप्राणित,तुलसी से जीवन! दूषित जल तुलसी से पावन,जीवन प्याला में!मन की तुलसी झुलस रही है,तन की ज्वाला में!! तन तुलसीघर में मन तुलसी,व्याकुल किस कारण!तन की तृष्णा मन अवशोषित,निश्चित निर्धारण! यौवन…