एक खामोशी !
बहुत कुछ समेटती है,
बहुत कुछ दफन करती है,
लम्बी खामोशी!
एक क़ैद, या मजबूरी
जहन में एक साथ उमड़ते
सैकड़ों सवालों की!
जज्बातों के उमड़ते
सैलाब को रोकता हुआ बांध!
खुद ही खुद से रूबरू कराने की
नाकाम जद्दोजहद!
बर्फ से रिश्तों को पिघलने से
रोकने की जिद!
भावनाओं का रद्दी हो चुका
भारी पुलिन्दा!
अनसुनी लम्बी कहानियाँ
औऱ दिल में दफन पुराने हादसे,
टूट चुके ख़्वाबों के टुकड़ों से
बने जख्म जो चुभते हैं अक्सर
जंग लगे लोहे की तरह,
कई बिखरी हुई यादें,
खामोशी छुपाती है,
कई किस्से,
कई राज,
ये खामोशी समेट लेती है,
अपने भीतर हजारों अल्फाज!
• डॉ. संयोगिता शर्मा

Bahut बढ़िया
Thanks dear
बहुत ही भावपूर्ण.. ज़िंदगी की जद्दोजहद को रेखांकित करती रचना 👌👌
Thank you sir
सुने नहीं जाते,
तैरते जाते हैं
मन के आकाश में
रेगिस्तान में
बियाबान में
अनुभूत भर होते हैं
अन्तःस्तल में चुपचाप
मौन
खामोशऔर
प्रशांत
तरंगें उमगती हैं
सागर की गहराइयों में ही।