खामोशी

एक खामोशी !

बहुत कुछ समेटती है,

बहुत कुछ दफन करती है,

लम्बी खामोशी!

एक क़ैद, या मजबूरी

जहन में एक साथ उमड़ते 

सैकड़ों सवालों की!

जज्बातों के उमड़ते

सैलाब को रोकता हुआ बांध!

खुद ही खुद से रूबरू कराने की

नाकाम जद्दोजहद!

बर्फ से रिश्तों को पिघलने से

 रोकने की जिद!

भावनाओं का रद्दी हो चुका

भारी पुलिन्दा!

अनसुनी लम्बी कहानियाँ 

औऱ दिल में दफन पुराने हादसे,

टूट चुके ख़्वाबों के टुकड़ों से 

बने जख्म जो चुभते हैं अक्सर 

जंग लगे लोहे की तरह,

कई बिखरी हुई यादें,

खामोशी छुपाती है,

कई किस्से,

कई राज,

ये खामोशी समेट लेती है,

अपने भीतर हजारों अल्फाज!

                 

 • डॉ. संयोगिता शर्मा

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5 Comments
Preeti
11 months ago

Bahut बढ़िया

Dr.Sanyogita
Reply to  Preeti
11 months ago

Thanks dear

शुभेन्द्र
11 months ago

बहुत ही भावपूर्ण.. ज़िंदगी की जद्दोजहद को रेखांकित करती रचना 👌👌

Dr.Sanyogita
Reply to  शुभेन्द्र
11 months ago

Thank you sir

Devendra prakash singh Singh
11 months ago

सुने नहीं जाते,
तैरते जाते हैं
मन के आकाश में
रेगिस्तान में
बियाबान में
अनुभूत भर होते हैं
अन्तःस्तल में चुपचाप
मौन
खामोशऔर
प्रशांत
तरंगें उमगती हैं
सागर की गहराइयों में ही।