• हास्य कविता

    हास्य कविता

    1. लगे जो कोकिला तुमको कहीं कौआ नहीं निकले।लगे जो हंसिनी तुमको कहीं बगुला नहीं निकले।जमाना फेसबुक इंस्टा का है इसमें संभलना तुमतुम्हारी फेवरेट लड़की कहीं लड़का नहीं निकले। सुबह उठते ही पहले हाथ में बस फोन दिखता है।नशा ये फेसबुक का है चढ़ा जो रोज रहता है।मुझे डॉक्टर ने बुलवाया छुड़ाने फेसबुक की लत,मगर…

  • शिक्षक

    शिक्षक

    क्योंकि मौका शिक्षक-दिवस का था, तो निबंध-प्रतियोगिता जैसी वारदात का शीर्षक था- शिक्षक। छात्रों ने ऐसे-ऐसे निबंध लिखे कि तमाम शिक्षक भयंकर रूप से भावुक हो गए। खुशी में इतना रोए, कि कई का तो दम निकल गया। यहाँ तक कि नेता पक्ष-विपक्ष, अभिनेता, मवाली-बवाली और हर रुलाने वाला व्यक्ति दहाड़े मारकर रो पड़ा था।…

  • महिमा संचालक की

    महिमा संचालक की

    फिल्मी लोग जिस तरह फिल्म बनाते वक्त क्रियेटिव लिबर्टी अर्थात कलात्मक आजादी लेते है,किसी भी कहानी को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत कर डालते हैं । उसी तरह कवि सम्मेलन का संचालक होता है जो बहुत ही क्रियेटिव तरीके से आजादी लेता है ।वो संचालक ही होता है जिसे पूरा हक होता है किसी की भी कविताएं…

  • ‘व्यंग्य का एपिसेंटर’ से

    ‘व्यंग्य का एपिसेंटर’ से

    •  अभिषेक अवस्थी

  • अप्पे का आतंक

    अप्पे का आतंक

    सोशल मीडिया के जमाने में आतंक मचाने के लिए सोशल मीडिया ही काफ़ी है।आजकल के वीडियो इसके गवाह हैं। काकी सोच में पड़ गई कि उनकी रसोई में बने हुए अप्पे पूरे सोशल मीडिया पर कैसे दिखाई दे रहे हैं! किसी ने कोई जासूस तो नहीं लगा रखा? एआई के जमाने में सब कुछ संभव…

  • सोशल मीडिया का मेडिकल सर्टिफिकेट

    सोशल मीडिया का मेडिकल सर्टिफिकेट

    सोशल मीडिया के जमाने ने बीमारी प्रमाणीकरण के पैमाने बदल कर रख दिए है। स्कूल के दिनों को याद करते हुए सोचता हूं कि उस समय जब हम बीमार होते थे तो किसी चिकित्सक से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा कर जमा करवाना पड़ता था। यह मेडिकल सर्टिफिकेट ही हमारी बीमारी को बीमारी सिद्ध करता था और…

  • डिजिटल इश्क़

    डिजिटल इश्क़

    फ़ेसबुक पर एक अधेड़ कवि को सुबह से दिल टूटने वाली शायरी चेपते देखकर अपनी खोपड़ी घूमी। मन के आसमान में प्रश्नों के बादल घुमड़ने लगे “आखिर माजरा क्या है ? फिर एक इंटेलिजेंस वाला प्रश्न भी आया- ये एक भारतीय पति है, अपनी पर्सनल पत्नी के लिए इतना प्रेम सार्वजनिक रूप से तो नहीं…

  • मृत्यु क्या है… जीवन ही तो है

    मृत्यु क्या है… जीवन ही तो है

    भाईसाहब का ट्रैक रेकॉर्ड सदैव एक सा रहा। हार-जीत से परे। न दीन की चिंता, न दुनिया की फिक्र। उधर चुनाव समाप्त, इधर वे बिस्तर को प्राप्त। सदैव समान। दल भले ही हवा देख बदल दें, मगर दिल कभी नहीं बदला उनका। मसलन, धोखा देना है, तो देना है। बात खत्म! चुनाव निपटते ही वे…