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रवि जगमगाएगा फिर से
क्यों बने संकल्प पथ परवह चरण जो धूल परजल रहे होंगे सितारेउस सिंधु के कूल परप्रश्नचिह्न उनके चरणों परजिनको खुद चलना होगादिनकर तुम रहना सजगआख़िर तुम्हें ही जलना होगा। भरी रात्रि के अँधियारे मेंअश्रु बहकर खुले नयन सेलुढ़क-लुढ़क कर इस तरह वहतुमको ही बतलाएगा।विस्तृत नभ के आँगन मेंनित्य दिवस की परछाई परराग खेलते शलभों परमंच… आगे पढ़े
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रंगों की होली
रंग डारो ना कान्हा मोहे आजदूंगी भर भर गारी रे… आगे पढ़े
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गीत: विष्णुपद छन्द
मन की तुलसी झुलस रही है,तन की ज्वाला में!हुलस रहा… आगे पढ़े


