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चिरमी म्हारी लाडली
सात समंदर पार कर’र हवाईज्हाज सूं ज्यूं ई म्हैं जयपुर रै अंतररष्ट्रीय हवाई-अड्डै पर उतरी तो हरख बावळी-सी होवै ही। आपणी मायड़भोम… आगे पढ़े
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रमतिया के गीत
रमतिया के गीत रंगीले राजस्थान की हर बात निराली है। परंपरा और संस्कृति की समृद्धि और वैज्ञानिक आधार जितना इस प्रदेश का… आगे पढ़े
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राजस्थानी कवितावां!
(1) रेतीला टिब्बाम्हारो छिबम्हारे हियै मांयरच्या-बस्या ! टिब्बा, सैनाणीटिब्बा म्हारों मांणटिब्बा जकै सारुं म्हनें गीरबो है !टिब्बा फगत बेळू रा धोरा नीं… आगे पढ़े
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मरु की माटी बोल उठी
मरु की माटी बोल उठी,धूप में भी जल नहीं पिघली,रेत के कण-कण में बसती,गौरव गाथा स्वर्ण लिखी।जहाँ हवाओं में लोक गीत हैं,और… आगे पढ़े
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तीन रेगिस्तानी कविताएँ
तीन रेगिस्तानी कविताएं– 1.लोक-जीवन का यथार्थ तुम्हें–भुरटों से बाथेडा़ भरते कृषकखेजड़ियों से लूंख लाती ग्राम-वधुएंपानी की देडी़ कंधों पर लटकाएं ग्वाललकड़ियों का… आगे पढ़े
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रावणहत्था: लोककथा
रावणहत्था; लोककथा गोधूलि में थार की आभा सांझ की रेत पर उतर रही थी। पीली- नारंगी आभा में नहाए टीले, पश्चिमी राजस्थान… आगे पढ़े
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संजोग अर बिजोग सिणगार रा दूहां
गोर वरण री गोरड़ी, ऊभी निरखै हाथ।पीव अमीणौ आवसी, चुड़लौ लासी साथ।।1।। शब्दार्थ-गोर वरण – गोरे रंग की , गोरड़ी – पत्नी… आगे पढ़े
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दोरौ जीवण द्रौपदी!
द्रुपद घर जलमीअेक सुताहरख बधायां बंटी कै नींआ तौ ठाह कोनीपणवा ही रूप री डळी, गुणां री खांण इणसूं कोई नीं है… आगे पढ़े

