उत्तर प्रदेश

  • अवधी बोली

    अवधी बोली

    1. रचनाकार : डॉ. अनिरुद्ध कुमार ‘अभिराम’ रचना : “नदिया कहि गइ बतियन आज” “सूखि गइ नदिया कछु कहत, अँखियन मा भर… आगे पढ़े

  • दशरथ जी के लाल

    दशरथ जी के लाल

    आई गए मिथिला नगरिया हो दशरथ जी के लाल।मन मोहिनी है लुभावन सुरतिया,चमकी है पूरे नगर मा किरतिया।शीश मुकुट सोहै औ तिलक… आगे पढ़े

  • देशभक्ति गीत (अवधी)

    देशभक्ति गीत (अवधी)

    चलौ ‌जवानों आहुति देई,सरहद पै निज प्रान कै।मांगत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै। एक एक के बदले मां सौ दुश्मन कै… आगे पढ़े

  • महाकवि तोषनिधि

    महाकवि तोषनिधि

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    सम्पादक–वैचारिकी महाकवि तोषनिधि एवं ‘सुधानिधि’: कल आज और कल (कनौजी बोली के परिप्रेक्ष्य में) भारत की समृद्ध काव्यपरम्परा में ऐसे अनेक कवि… आगे पढ़े

  • कनौजी बोली

    कनौजी बोली

    कनौजी बोली: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, कालक्रम एवं भाषिक विकास 1. प्रस्तावना कनौजी बोली मध्य-गंगा-यमुना दोआब की एक प्रमुख लोकबोली है, जो पश्चिमी-केंद्रीय हिंदी… आगे पढ़े

  • कनौजी रसरंग-कहनौति

    कनौजी रसरंग-कहनौति

    काची पाकी कचकची बखत भोर को भजन को, सबकौं रामई राम।बहिन अवस्थी चंद सखि, मिसुर ददा परनाम॥ ददुआ चंद जू शत नमन,… आगे पढ़े

  • हियां बबुला बिहाय दई

    हियां बबुला बिहाय दई

    मूसर चलैं नाय हम्पै, हियां बबुला बिहाय दई।मका बाजरा जुंंड़ी ,दैया हम्पै पिसाय दई ॥हियां बबुला बिहाय… हमकौं जिय जंजाल बाजरा,कूटैं छरैं… आगे पढ़े

  • खिचड़ी

    खिचड़ी

    बहुत पुरानी बात है कि एक गाँव में कोई डाक्टर नाहीं हतो। पांच गाँव बाद एक कस्बा मैं एक डाक्टर बैठत हतो… आगे पढ़े

  • कहनौती

    कहनौती

    तीन की तरकसीतीन तीन की तरकसी, तामै नदियाँ पानी तीनदुई रूखी सूखी एक मै पानी नहींजा मै पानी नहीं उसमें मेंढक बैठे… आगे पढ़े

  • इक्षुमती नदी: एक पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहर

    इक्षुमती नदी: एक पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहर

    इक्षुमती नदी एक पौराणिक नदी है जिसका उल्लेख हिंदू और बौद्ध धर्मग्रंथों में मिलता है। यह नदी सांकाश्या (वर्तमान संकिसा, फ़र्रूख़ाबाद जिले… आगे पढ़े