देशभक्ति गीत (अवधी)

चलौ ‌जवानों आहुति देई,सरहद पै निज प्रान कै।
मांगत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै।

एक एक के बदले मां सौ दुश्मन कै संहार करी।
कांपै अरि कै टोली थर थर यस सीने पै वार करी।

लहर लहर लहराय तिरंगा, भारत देश महान कै।
मांगत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै।

आजादी कै चिनगारी ई धधकि उठै फिर सीने मां।
कवन मजा है देशप्रेम के भाव बिना फिर जीने मां।

मातृभूमि मागै बलिदनवा अपने वीर जवान कै।
मांगत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै।

दोहरावै इतिहास दुबारा, भगतसिंह, आजाद का।
गांधी, गौतम,वीर शिवाजी के जैसे फौलाद का।

बाल न बांका होये हमरी निज घाटी गलवान कै।
मांगत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै।

माई मांगै कर्ज दूध कै देशवा खातिर काम करौ।
बप्पा बोलै लाल हमारो ऊंचा जग मां नाम करौ।

रक्षा करबै भारत मां के लाज मान सम्मान कै।
मागत है कुर्बानी आपन माटी हिन्दुस्तान कै।

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देशभक्ति लोक गीत

बलम लाओ तिरंगा चुनरिया,
किनरिया पै भारत लिखा।

गोटा मा रहै भाल भारत हिमालय,
मन्दिर हो, पूजा हो संग मा शिवालय।

बलम रहैं राम,बांके संवरिया,
किनरिया पै हनुमत लिखा।
बलम लाओ……..

बिचवा मा निर्झर नदी प्यारी प्यारी।
हरियर चुनरिया मा खिलै फुलवारी।

बलम रहै चारों धाम कै नगरिया
किनरिया पै पर्वत लिखा।
बलम लाओ……..

अंचरा मा रहै पाठ सत्य औ अहिंसा।
वेद मंत्र गीता आऊ मानस प्रसंशा।

बलम रीति रसम से सजी पियरिया,
किनरिया पै मन्नत लिखा।

होली दीवाली कै चमकै सितारा।
झिलमिल अवधपुर कै निकै नजारा।

बलम लागै न केहू कै नजरिया।
किनरिया पै उन्नत लिखा।

सीमा शुक्ला अयोध्या

आराध्य आराधन से राष्ट्र आराधन
अवधी का माधुर्य, माटी की सुरभि और पौरुषेय ओज लोक की जीवंतता है। इन गीतों प्रिया का पिया से तिरंगी चुनरिया लाने का आग्रह ,जिसमें नग,नदी, कछार,पठार सिंधु और सस्य श्यामला हरीतमा अंकित हो, वहीं अगला गीत राष्ट्र हेत समर्पण, त्याग सेवाभाव का आवाहन घोष का तुमुल नाद है। राष्ट्र का आराधन बिना आराध्य की आराधना के संभव ही नहीं….यहीं अंतिम गीत का नांदी स्वर है…

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