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डिसेबिलिटी… एक्सेसेबिलिटी…
सालों से हमारे देश ने बहुत तरक्की की है, चाहे वो कला का क्षेत्र में हो या विज्ञान का हमने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। ये हमारे लिए गर्व की बात है कि इस बदलाव को लाने में सभी लोगों ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। पर प्रश्न यह है कि, क्या तरक्की…
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स्मृति वन
मन का मंथन अंतर्मन में जो ज्वालामुखीलावा बन फूटता हैवही लेखनी द्वाराकहानी कविता बन जाता है मन का विद्रोहही कागज पर बिछ जाता है जो दिखावा नहीं केवल सत्य होता हैवही रचना बन पाता है झूठ बुनने में, चुनने मेंसदियां लग जाती हैंसच पल में बाहर आ जाता हैऔर सुंदर रचना बन जाता है। घनघोर…
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माँ
‘माँ’ कल्पनामय दुनिया से भिन्न यथार्थ क्षितिज के धरातल का कितना अजीब सा शब्दशब्दों से भरी शब्दकोश जैसी किताबों में भी सर्वोच्च पद परहै पूरी कायनात समाहित इसमें !क्या ज़मीं क्या आसमां सब नतमस्तक है इसके सम्मुखसिंधुओं में भी इतनी गहराई नहीं इस एक शब्द के बराबर…धरा कम्पित-से प्रतीत होते है इस शब्द के सामनेजैसे…
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मुट्ठी भर प्यार
“धरा! मम्मी गुजर गयीं। पापा के कहने पर मैंने तुम्हें सूचना दे दी है। मैं निकल रही हूँ अभी।”-सुबकते हुए बुआजी ने बताया अभी। मैं उन्हें एक शब्द भी नहीं बोल पाई। बुआजी ने सूचना देकर फोन फौरन काट दिया। इतना पूछने की गुंजाइश ही नहीं छोड़ी कि ऐसा कब और कैसे हुआ? बुआजी को…
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जीवन का वह अमूल्य क्षण
उस क्षण की स्मृति आज भी मेरे अंतर्मन को झकझोर देती है। जब मैं अपनी ससुराल की देहरी पर पहली बार पाँव रख रही थी, तो भीतर एक गूढ़ शून्य था—जैसे आत्मा किसी अनजानी यात्रा पर निकल पड़ी हो। मेरी सोच के समंदर में असंख्य प्रश्नों की लहरें उठ रही थीं—क्या मैं इस विशाल परिवार…