मीनाक्षी मिश्र

आज हम आपके सब के लिए लेकर आए हैं मीनाक्षी मिश्र जी की एक बेहद खूबसूरत कविता।

एक अव्यक्त उन्माद है भीतर
कुछ स्पन्दन हैं शब्द विहीन
उग्र दिनों में बजता एक अचीन्हा राग है
मेरी मृदुता बनाए रखता है जो

मेरे होने में विराट भूमिका है
मेरी अपूर्णताओं की
अभी अलभ्य हैं
मेरी निर्मित्ति के
जाने कितने पक्ष!

मीनाक्षी मिश्र

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