• खंडहर

    खंडहर

    गाँव के बाहर की खारी जमीन, जिसकी धरती में नमक घुल चुका था। यहां की बावड़ी का पानी भी लवणीय था।हवा में समय की गहरी धूल फैली थी, वहीं एक पुराना खंडहर नुमा राजमहल था। लोग उसे “राखमहल” कहते थे।कहते हैं, बरसों पहले उस महल में “रुक्षिणी” नाम की एक नर्तकी रहती थी।रूक्षिणी — जिसकी…

  • मिनी

    मिनी

    मिनी ज़िद पर अड़ गई थी। उसकी ज़िद के आगे नीला को अपनी ज़िद छोड़नी पड़ी। हालांकि यह सब करते हुए नीला को कई पहाड़, कई दरिया,कई सहरे पार करने पड़े। इन तकलीफ़देह मुश्किलों से वह सायास बचने की कोशिश करती रही है अबतक। लेकिन मिनी की ज़िद ने उसे उन्हीं बीहड़ों में लौटने को…

  • वाचकन्वी

    वाचकन्वी

    बाँस छिलने में बाँस से ज्यादा दर्द छुरी ने भोगा। वो वाला एक दिन।जब चतुर शहर के गोरखधंधे बंद हो गए थे। जब कच्ची सड़क के साथ शहर की ऊंचाइयों का कद घिसटकर घटने लगा था। जब पूर्णविराम होकर शहर के बाज़ार, व्यापार, वाणिज्य, लाभ-लोभ, रुपया, कारोबार एक मुठ्ठी में लुढ़ककर शिशु की गहरी मासूम…