ठुमक के आ गई होली रे

फागुन में दिल हुआ रंगीला
मन में टेसू फूले
रंग- बिरंगे रंगों के संग
गुझिया मिठाई भटूरे

देख के टोली हुरियारो की
दिल की धड़कन बोली
रंग- बिरंगे रंगों के संग
ठुमक के आ गयी होली

नीला पीला हरा गुलाबी
केसरिया लाल गुलाल
भर भर के सब थाल सजे है
तन- मन रंग लो आज

भूल जाओ सब झगड़े – झंझट
भर पिचकारी लाओ
राग- द्वेष को भूल के सारे
प्रेम के रंग रंग जाओ ।।


डॉक्टर लक्ष्मी कुशवाह, भोपाल मप्र

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