दृश्यम् में आज प्रस्तुत है सरिता सेल जी की कविता।
एक जोड़ी जूते का
घर से चले जाना
मेरे बच्चे के लिए प्रश्नचिह्न था
मेरे लिए निरुत्तर जीवन था
समाज के लिए एक ऐसी खबर
जो बिना अखबार
रोज़ छपती रही
मनोरंजन के बाज़ार में।
• सरिता सेल

दृश्यम् में आज प्रस्तुत है सरिता सेल जी की कविता।
एक जोड़ी जूते का
घर से चले जाना
मेरे बच्चे के लिए प्रश्नचिह्न था
मेरे लिए निरुत्तर जीवन था
समाज के लिए एक ऐसी खबर
जो बिना अखबार
रोज़ छपती रही
मनोरंजन के बाज़ार में।
• सरिता सेल